सेवा के पाँच वर्ष: योगी नाथ उपाध्याय संगठन की यात्रा

5 वर्ष पूर्णता पर विशेष लेख
अखिल भारतीय योगी नाथ उपाध्याय समाज सेवा संगठन (पंजी० S-E/1825)

11 जुलाई 2026

आज वह ऐतिहासिक दिन है जब सेवा, समर्पण और संस्कार की नींव पर खड़ा हमारा संगठन अपने गौरवपूर्ण सफर के 5 वर्ष पूरे कर रहा है।

इस स्वर्णिम अवसर पर राष्ट्रीय अध्यक्ष परम पूज्य योगी तेजपाल सिंह जी के दूरदर्शी नेतृत्व, राष्ट्रीय व प्रदेश कार्यकारिणी, मंडल व जिला अध्यक्षों, समस्त पदाधिकारियों एवं देशभर में फैले समाज के सभी भाई-बंधुओं, माताओं-बहनों को हृदय से बधाई एवं नमन।

ये 5 वर्ष केवल तारीखों का हिसाब नहीं हैं। ये त्याग, संघर्ष और निस्वार्थ सेवा की जीवंत गाथा हैं।

पांच वर्षों की पहचान: सेवा ही संकल्प

1. स्वाभिमान की रक्षा और जनजागरण
समाज के मान-सम्मान पर आंच न आए, इसके लिए संगठन ने “गोरखधंधा” जैसे अनैतिक शब्द पर रोक लगाने हेतु कई राज्यों के माननीय मुख्यमंत्रियों को ज्ञापन सौंपे। यह केवल एक शब्द के विरुद्ध अभियान नहीं था, बल्कि हमारी भाषा और अस्मिता की मर्यादा बचाने का आंदोलन था।

इसी भाव के साथ प्रदेश-प्रदेश, जिले-जिले में विशाल जनसभाएं आयोजित हुईं। मंच से समाज को उसके अधिकार, कर्तव्य और राष्ट्रधर्म की चेतना दी गई।
जब-जब किसी पीड़ित परिवार की पुकार हम तक पहुंची, राष्ट्रीय अध्यक्ष जी के निर्देश पर तुरंत सहायता पहुंची — आर्थिक सहयोग हो, प्रशासनिक मदद हो, स्वास्थ्य या शिक्षा का सहारा। इसी निस्वार्थ भाव के कारण आज यह संगठन पूरे भारत में विश्वास का प्रतीक बन चुका है।

2. बेटियों के सम्मान में सामूहिक आदर्श विवाह
बुंदेलखंड से लेकर मध्यप्रदेश, उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र तक, आर्थिक तंगी के कारण जो बेटियां अपने सपने तौल रही थीं, उनके लिए कई राज्यों में सामूहिक आदर्श विवाह संपन्न कराए गए। यहां धन के साथ सम्मान भी दिया गया। ये आयोजन समाज की एकता, संवेदना और “बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ” के संकल्प का सबसे सुंदर उदाहरण बने।

3. शिक्षा, धर्म और मानव सेवा का त्रिवेणी संगम
राष्ट्रीय अध्यक्ष योगी तेजपाल सिंह जी के मार्गदर्शन में जरूरतमंद बच्चों की शिक्षा हेतु अनुदान, मंदिर-धर्मशाला निर्माण और असहाय परिवारों की हरसंभव मदद की गई। कई बार यह सहयोग स्वयं अध्यक्ष जी ने मौन रहकर किया — बिना किसी प्रचार के। ऐसी सेवाभावना ही उन्हें हम सबका प्रेरणास्रोत बनाती है।

उनके आदेश पर कार्यकर्ता तन-मन-धन से जमीन पर उतरे।
सुंदरकांड पाठ, गोरक्ष महोत्सव, नवरात्रि में माँ की चौकी और जागरण, सावन में कावड़ शिविर, भोले की बारात — हर पर्व पर राष्ट्रीय अध्यक्ष जी की उपस्थिति और योगदान को न केवल नाथ योगी उपाध्याय समाज ने, बल्कि सर्व समाज ने देखा और सराहा। आज वे समाज में श्रद्धा और सम्मान के केंद्र बन चुके हैं।

4. विचार से विस्तार तक
नियमित विचार संगोष्ठियों ने समाज को संगठन की योजनाओं से जोड़ा। नए कार्यकर्ता जुड़े, पुराने और मजबूत हुए। परिणामस्वरूप आज संगठन राष्ट्रीय से जिला स्तर तक एक सशक्त, अनुशासित और सक्रिय नेटवर्क के रूप में कार्य कर रहा है।

हमारी पहचान: नाम नहीं, काम बोलता है
पिछले 5 वर्षों में हमने सिद्ध किया कि संगठन पोस्टर से नहीं, परिश्रम से बनता है।
शिक्षा के क्षेत्र में, बच्चों के उज्ज्वल भविष्य में, राष्ट्रीय-स्तर के खेलकूद में और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर बेटियों के हौसलों को उड़ान देने में — जहां भी जरूरत हुई, संगठन ने आर्थिक सहयोग और प्रोत्साहन देकर उनके सपनों को पंख दिए।

दुख में कंधा देना, अन्याय के विरुद्ध आवाज उठाना और जरूरतमंद का हाथ थामना — यही हमारी परंपरा है, यही हमारा धर्म है।

राष्ट्रीय अध्यक्ष योगी तेजपाल सिंह जी के विजन और पूरी टीम की दिन-रात की मेहनत से आज “अखिल भारतीय योगी नाथ उपाध्याय समाज सेवा संगठन” समाज में सम्मान और भरोसे का दूसरा नाम बन चुका है।

आगे का संकल्प
पहले 5 वर्ष नींव थे, अब इमारत खड़ी करनी है।
आने वाले वर्षों में हमारा लक्ष्य है:
– शिक्षा को हर घर तक पहुंचाना
– स्वास्थ्य सेवाओं को सुलभ और सस्ता बनाना
– महिला सशक्तिकरण को नई दिशा देना
– सामाजिक कुरीतियों का समूल उन्मूलन करना

यह संगठन राजनीति से परे है। इसका एक ही लक्ष्य है — समाज सेवा।

आइए, इस 5वीं वर्षगांठ पर हम सब यह संकल्प लें कि संगठन को नई ऊंचाइयों तक ले जाएंगे और “सेवा ही पूजा है” इस मंत्र को जीवन का आधार बनाएंगे।

एक बार पुनः समस्त देशवासियों, पदाधिकारियों और समाज बंधुओं को 5वीं वर्षगांठ की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं।

जय समाज, जय राष्ट्र, जय हिंद

लेखक: योगी प्रवीण कुमार, दिल्ली

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